दूध में दरार पड़ गई - अटल बिहारी वाजपेयी

दूध में दरार पड़ गई

खून
क्यों सफेद हो गया
भेद में अभेद खो गया
बँट गये शहीद, गीत कट गए
कलेजे में
कटार गड़ गई
दूध में दरार पड़ गई

खेतों
में बारूदी गंध,
टूट गये नानक के छंद
सतलुज सहम उठी,
व्यथित सी
वितस्ता है।
वसंत से बहार झड़ गई
दूध में दरार पड़ गई।

अपनी
ही छाया से बैर,
गले लगने लगे हैं गैर,
ख़ुदकुशी का रास्ता,
तुम्हें वतन
का वास्ता।
बात बनाएँ, बिगड़ गई।
दूध में दरार पड़ गई।

८ दिसंबर २००१

Comments

Popular posts from this blog

मेरे प्रभु! मुझे इतनी ऊँचाई कभी मत देना गैरों को गले न लगा सकूँ इतनी रुखाई कभी मत देना।

ऐ वतन, ऐ वतन, हमको तेरी क़सम,तेरी राहों में जाँ तक लुटा जायेंगे,

मधुशाला - हरिवंशराय बच्चन